किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 13 को दिल्ली में रैली : किसान संघ

undefinedदेहरादून, 26 अगस्त : भारतीय किसान संघ का कहना है कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं। किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ 13 सितम्बर को रामलीला मैदान नई दिल्ली में एक विशाल रैली करने जा रहा है। जिसमें किसानों की 9 सूत्री समस्याओं पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इसी संदर्भ में किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष भुवन विक्रम डबराल, अ. भा. महामंत्री प्रभाकर केलकर, अ. भा. संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी, अ. भा. कोषाध्यक्ष युगल किशोर तथा क्षेत्र संगठन मंत्री राम मनोहर पाण्डेय ने विश्व संवाद केन्द्र में पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि सरकारों की किसान विरोधी नीतियों के कारण वर्तमान में अस्सी प्रतिशत के बजाय  64 प्रतिशत किसान रह गये हैं। आजादी के बाद सकल घरेलू उत्पाद की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गयी हैं।

विश्व बैंक के एक रिपोर्ट के 2008 के अनुसार गरीबी दूर करने के लिए कृषि का एक प्रतिशत का विकास, उसी प्रकार गैर कृषि विकास तीन गुना से अधिक प्रभावी है। सरकार द्वारा जानबूझकर कृषि को घाटे का सौदा बनाया जा रहा है। किसान खेतों छोडऩे को मजबूर हो रहा है। पिछले वर्ष में दो लाख साठ हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है और 42 प्रतिशत से अधिक किसान खेती छोडऩे की तैयारी कर रहा है। लाभकारी मूल्य न मिलने के कारण यह खतरनाक अवसाद की स्थिति सम्पूर्ण देश में देखी जा रही है। एक दशक में बीस लाख हैक्टयर कृषि भूमि को गैर कृषि कार्यो के लिए अधित किया गया। 

भारतीय किसान संघ, जिसकी शाखाऐं देश के लगभग 450 जिलो तथा 65000 गांवों में हैं, अपने लगभग 21 लाख सदस्यों के माध्यम से 13 सितम्बर को रामलीला मैदान नई दिल्ली में किसान अधिकार रैली का आयोजन करने जा रहा है। किसान को लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिया जाय। समस्त कृषि उत्पादों को लाभकारी मूल्य पर खरीदने की गारन्टी हो।

किसान नेताओं का कहना है कि कृषि बजट का अलग से प्रावधान तथा पानी व बीजों के निजीकरण को वापस लिया जाए। किसानों की भूमि का अधिग्रहण करते समय उसे पट्टे पर लिया जाए। कृषि योग्य भूमि किसानों के लिए हो तथा उत्तराखंड के आपदाग्रस्त किसानों को सहायता दी जाए। किसान संघ नेताओं का कहना है कि 13 सितम्बर को हजारों हजार किसान अपने मांगे मनवाने के लिए सरकार पर दबाव डालेंगे।