भारतीय किसान संघ के किसान अधिकार रैली में लाखों की तादाद

undefinedनई दिल्ली, सितंबर 14 : 13 सितम्बर को भारतीय किसान संघ की किसान अधिकार रैली में देशभर से- जम्मू से लेकर असम तक, केरल से लेकर गुजरात तक करीब 400 जिलों से आए हजारो किसान प्रतिनिधिओं ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्रित होकर अपना रोष प्रकट किया। सबके मुंह में एक ही बात थी ‘किसानों ने ठाना है, लाभकारी मूल्य पाना है’। 

२०१३ के 29-30 अप्रैल को देशभर के किसान संघ प्रतिनिधि दिल्ली आकर अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों को मिले और पिछले एक दशक से केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण कैसे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए ये उन्हें समझाया। करीब 300 सांसदों ने सारी बातें सुनी और बताया गया अगर पार्टी का व्हीप नहीं होगा तो सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ हम खड़े होंगे। परन्तु सांसदों द्वारा किसानों को दिये गए भरोसे का कोई परिणाम नहीं निकला। खाद्यान्न सुरक्षा बिल में किसानों के हित के बारे में कोई संदर्भ देखने को नहीं मिला। 

किसानों को लगता हैं कि यह सरकार किसानों के विरुद्ध अघोषित युद्ध छेड़ चुकी है। इसीलिए भारतीय किसान संघ ने 13 सितंबर को किसान अधिकार रैली का आयोजन किया था। जिसके माध्यम से किसानों की प्रमुख 5 मांगों को सरकार के समक्ष रखा।

1. किसानों को लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिया जाए।

2. समस्त कृषि उत्पादों को लाभकारी मूल्य पर खरीदने की गारण्टी हो।

3. रेल बजट के समान कृषि बजट का अलग प्रावधान हो।

4. पानी एवं बीजों के निजीकरण बिल को वापस किया जाए।

5. भूमि- अधिग्रहण विधेयक के स्थान पर भूमि उपयोगिता विधेयक किया जाए। किसानों को भूमि का स्वामित्व अधिकार तथा भूमि को किराये पर पगड़ी के साथ दिये जाने का अधिकार हो और भूमि से खनिज सम्पदा प्राप्त होने पर उसकी रॉयल्टी भू-स्वामी को भी प्राप्त हो तथा कृषि योग्य भूमि को कृषि कार्यों के लिए ही सुरक्षित किया जाए। 

undefinedइस संदर्भ में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अण्णा साहेब मुरकुटे के नेतृत्व में 8 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल 12 सितम्बर 2013 सायं 6:15 पर महामहिम राष्ट्रपति प्रवण मुखर्जी से मिला तथा उन्हें किसानों की समस्याओं से अवगत कराया। 

प्रतिनिधि मण्डल में महामंत्री प्रभाकर केलकर, मंत्री अंबु भाई, सुनील पाण्डेय, मोहनी मोहन मिश्र, बृज किशोर, राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकणी व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष युगल किशोर शामिल थे। राष्ट्रपति महोदय ने कई बिन्दुओं पर गंभीरतापूर्वक चर्चा की और अपने स्तर पर किसानों की समस्यों के समाधान के लिए प्रयास करने का आश्‍वासन दिया। । प्रतिनिधि मण्डल ने भारतीय किसान संघ द्वारा तैयार की गई कृषि नीति की एक पुस्तिका भी राष्ट्रपति महोदय को भेंट की। 

किसान अधिकार रैली में उमड़ी भीड़ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अन्ना साहेब मुरकुटे ने सबका स्वागत करते हुए कहा कि किसानों के ऊपर अन्याय करने की भी कुछ हद होती है। लाखों किसानों द्वारा आत्महत्त्या करने के बाद भी सरकार की आंखें नहीं खुली। इसलिए हम लोग यहां आये हैं कि देश का किसान क्या चाहता है तुम स्वयं देख लो। 

राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने बताया कि ‘देश के हम भण्डार भरेंगे, लेकिन कीमत पूरी लेंगे’ विषय को लेकर लोग चले थे। देश का भंडार किसानों ने भर दिया है। अभी उसका लाभकारी मूल्य लेना हमारा अधिकार बन जाता है। 

राष्ट्रीय सचिव सुनील पाण्डेय ने बताया कि देश के आर्थिक समवृद्धि के लिए कृषि के लिए अलग बजट होना जरूरी है। अगर देश का हित होना है तो ग्राम आधारित, कृषि आधारित, गो आधारित नीतियां बनाना जरूरी है। 

राष्ट्रीय मंत्री मोहिनी मोहन ने बताया कि जो किसान के हित में काम करेगा वही देश पर राज करेगा। सरकार ने किसानों का बीज एवं खाद छीना, भू-अधिग्रहण के माध्यम से किसानों की भूमि छीनने की पूरी-पूरी तैयारी है। भारतीय किसान संघ द्वारा जारी आज की प्रमुख पांच मांगें जिन राजनीतिक दलों के चुनाव घोषणा पत्र में होगी उसके बारे में ही देश का किसान सकारात्मक रुख अपना सकता है। 

undefinedअंत में राष्ट्रीय महामंत्री प्रभाकर केलकर ने किसानों के बीच जोश भरते हुए बताया अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है। सरकार भूमि सुधार के नाम पर छोटे और मंझले किसानों को खेत से निकालने की तैयारी में है। बायो-टेकनालॉजी के नाम से सारे बीज का अधिकार किसानों से छीन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को सौंपने का षडयंत्र हो रहा है। कृषि और किसान संवैधानिक तौर पर राज्यों का विषय होते हुए भी केन्द्र की यह सरकार इसमें लगातार हस्तक्षेप करते हुए किसानों का हक छीन रही है। इससे पता लगता है कि सरकार की नीयत में खोट है। इसलिए हम और चुप नहीं बैठ सकते, उन्होंने सभी राजनैतिक दलों से आग्रह करते हुए किसानों को बताया कि आगे आने वाले चुनाव में सबसे किसानों के हित का उत्तर मांगे अन्यथा भुगतने को तैयार रहें। 

किसान अधिकार रैली के संयोजक अम्बु भाई पटेल ने रैली की सारी तैयारियों और सारे प्रतिनिधियों का विवरण दिया तथा आभार व्यक्त किया। 

रैली के मंच पर रामाशीष सहित सभी प्रांतों के अध्यक्ष व अन्य 75 किसान नेता उपस्थित थे। सभी प्रांतों से आये किसान नेताओं ने अपनी भाषा में ही किसानों का सम्बोधन कर उनमें जोश भरा। प्रांत से आये किसानों की संख्या का विवरण प्रस्तुत किया गया जो 1 लाख से अधिक के आंकड़े को पार कर गया। देश में अब तक की किसानों की हुई रैलियों में यह सबसे बड़ी रैली है। 12 सितम्बर सुबह से किसान संघ के किसान प्रतिनिधि आना शुरु हुए जो शाम तक करीब 20 हजार हो चुके थे। 13 सितम्बर प्रात: से ही आस-पास के किसान गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि प्रदेशों से अपने छोटे बड़े वाहनों से भर-भर कर आये थे। 

रैली में भारतीय किसान संघ द्वारा कृषि नीति पर तैयार की गई पुस्तक का विमोचन अण्णा साहेब मुरकुटे व भारतीय कृषि आर्थिकी शोध केन्द्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष पृथी सिंह वत्स ने किया।