भारतीय किसान संघ का राजस्थन के सभी तहसिल केंद्र पर प्रदर्शन


दि.9 अगस्त 16 को भारतीय किसान संघ का राजस्थन के सभी तहसिल केंद्र पर किसनो कि समस्या लेकर प्रदर्शन

  1. सिचांई:-
  • जयपुर जिले के सूखे बांधो को यमूना के बाढ़ का पानी लाकर भरा जाये। राजस्थान में नदी जोड़ो योजना के तहत् साबी, चम्बल, बनास, का नदी बेसन बनाया गया था। इस नदी बेसन योजना के तहत् सवाईमाधोपुर जिले का इसरदा बांध को भरकर जयपुर जिले के रामगढ़ बांध व कालख बांध को भरने की योजना बनाई गई थी। जिसकी डी.पी.आर बन गई थी परन्तु इसरदा बांध से पानी को जयपुर के बजाय धोलपुर ले जाने की योजना बनाई जा रही हैं जो जयपुर जिले की जनता के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा हैं। अगर इस पानी को जयपुर में नहीं लाया गया तो जयपुर जिले की जनता को मजबूर होकर आंदोलन करना पडेगा। इस पानी को जयपुर जिले में लाकर इन बांधो को भरा जाये।
  • नदियों को आपस में जोड़कर ग्रिड बनावें ताकि सिंचाई व पेयजल राजस्थान के सभी लोगो को उपलब्ध हो सके।
  • पेण्डिंग लिफ्ट सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी जावे।
  • सिंचाई परियोजनाओं के काम सही करवावें ताकि पैसा बर्बाद न हों।
  • प्रत्येक जिले में सिंचाई रेगुलेटरी बोर्ड बनें, जिसमें किसान संघ के प्रतिनिधी भी हो।
  1. जे.डी.ए:-
  • जयपुर जिले के जेडीए क्षैत्र के गांवों में आने वाले किसानों को राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में मकान, पशुशाला व भण्डारण के लिए 500 वर्ग मीटर का निःशुल्क पट्टा देने का आदेश दिया था। उसे लागू कर किसानों को निःशुल्क पट्टे दिये जाये।
  • जेडीए द्वारा जयपुर जिले के अनुमोदित सैक्टर प्लान में 80 फीट से 200 तक की सैक्टर रोड़ के दोनो और रोड़ की चैडाई के बराबर काॅमर्शियल पट्टी के लिये जमीन अवाप्त करने का प्रावधान लागू कर दिया। जिससे किसानों का रोजगार चैपट होकर खेत के खेत साफ होकर रहने के लिये मकान भी नहीं बचता हैं। ऐसे में रोड़ के अलावा काॅमर्शियल पट्टी के नाम पर जमीन अवाप्त नहीं की जाये।
  1. कृषि ऋण-
  • सहकारी समितियों में किसानो की हिस्सा राशि 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दी गई,
  • बिना ब्याज के कृषि ऋण की सीमा 25 प्रतिशत कम कर दी गई, वापिस पहले के अनुसार की जावे।
  • बिना ब्याज के ऋण को जमा करने की अवधि 30 जून तक स्थायी रूप से किया जावे।
  • किसानो को फसली ऋण में एन.ओ.सी. के लिये कई बैंक द्वारा तय किये वकीलो से सर्च सर्टिफिकेट बनवाने पड़ते है, इस कारण किसानो को इसका मनमाना पैसा चुकाना पड़ता है, सर्च सर्टिफिकेट के स्थान पर प्रार्थी का शपथपत्र व तहसीलदार की रिपोर्ट को आधार माना जावे।
  • किसानो को ऋण वसूली के साथ ही हाथो हाथ पुर्नभुगतान की सुविधा दी जावे, ताकि उन्हे दलालो के चंगुल से बचाया जा सके,
  • सहकारी संस्थाओं के माध्यम से दिये गये ऋण से खाद बीज लेना अनिवार्य इसे खत्म किया जावे। नकद ऋण बन्द कर दिया गया है।
  1. फसल खराबा व नुकसान-
  • जयपुर जिले में ओलावृष्टि, अतिवृष्टि, बमौसम की बरसात से प्रभावित कई किसानो को 2014-15 की सरकारी सहायता अभी तक नहीं मिल पाई है, इनको तुरन्त प्रभाव से सहायता दी जावे।
  • वर्ष 2015-16 की खरीद में सोयाबीन आदि फसलो का अभी तक अनुदान नहीं बांटा गया है, इसे तुरन्त बांटा जाये।
  • फसल खराबे में केवल पटवारी रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। हल्को में पटवारी कम है तथा घर बैठकर मनमर्जी से रिपोर्ट बनाते है, इसके स्थान पर कृषि अधिकारी व गांव के किसान प्रतिनिधी को मिलाकर समिति बने उसकी रिपोर्ट अंतिम मानी जावे।
  1. बिजली संबंधी -
  • सरकार द्वारा बिजली को निजि कम्पनियों को देने की सोच रही हैं। यह जनहित में नहीं हैं अगर निजिकरण किया तो राजस्थान में भी ही बाडी अटरू और बानसूर जैसे हालात हो जायेंगे। जब वर्ष 2000 में विद्युत मण्डल को 1700 करोड़ रूपये का घाटा हुआ तो इस घाटे से उभारने के लिये विद्युत मण्डल का विघटन कर पाॅच कम्पनियों बनाई गई। जिसका 2016 तक 1 लाख करोड़ घाटा तक पहुंच गया। इसका स्वेत पत्र जारी कर जिन अधिकारियों के कार्यकाल काल में घाटा हुआ उनके खिलाफ कार्यवाही कर उनसे घाटा वसूला जाये।
  • जब तक किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिल जा था। तब तक विद्युत दरें नहीं बढ़ाई जाये।
  • किसानो को बिजली कम्पनियों द्वारा निर्धारित घंटो में अनवरत व पूरी बिजली नहीं मिलती, खेती के लिये आवश्यक समय से लगातार पूरे समय बिजली मिलनी चाहिये।
  • फ्लेट रेट व मीटर रिडिंग दोनो आधारो में स्वैच्छिक आधार पर बिल जारी होना चाहिये।
  • कृषि कनेक्शन के लिये आवेदन के 6 माह में कनेक्शन जारी हो
  • छोटी छोटी खराबियों के आधार पर जैसे मीटर खराब होने पर ट्रांसफार्मर को खोलकर मुख्यालय ले जाते है, इसे ट्रान्सफार्मर की जगह पर ठीक किया जावे।
  • विद्युत नियामक आयोग ने आपत्तियों को सुनते वक्त मात्र 2 दिनो का ही वक्त दिया, ऐसे में आपत्तियां सही तरीके से नहीं रख सके। आपत्तियों के लिये कम से कम 8 दिन पूर्व सूचित किया जावे।
  • खेती में सिंगल फेज कनेक्शन किया जावे।
  • डार्क जोन में बिजली कनेक्शन नहंी दिये जाते, इन्हे वापिस चालू किया जावे।
  • कनेक्शन के स्वीकृत लोड से अधिक पाये जाने पर एक माह का नोटिस देकर निशुल्क लोड बढ़ाया जावे।
  1. मण्डी संबंधी -
  • कोटा की तर्ज पर राजस्थान की सभी मण्डियों में बड़े इेक्ट्रिक कांटे लगावें 10 से 15 टन तक के लगावें।
  • मण्डियों में किसानों के माल का कड़दा नहीं काटा जाये। उनको पूरे माल का तोल दिया जाये।
  • अलग अलग स्थानो पर उत्पादन के अनुसार विशेष मण्डियां स्थापित की जावे, जैसे - जयपुर जिले की जयपुर तहसील के ग्रांम बसेडी में मटर मण्डी,तहसील जम्मारामगढ़ में फल, फूल व सब्जी मण्डी का निर्माण कराया जाये।
  • मण्डियों में बने कृषक प्लेट फार्मों पर व्यापारियों द्वारा कब्जे कर रखे उनको तुरन्त प्रभाव से हटाया जाये।
  • मण्डियों में प्रवेश करते ही जिंस का बीमा हो, नुकसान होने पर किसानो को मुआवजा दिया जावे।
  • कई बार व्यापारी किसानो से माल खरीद कर बिना भुगतान किये भाग जाते है, व्यापार का लाईसेंस देते वक्त उसके टर्नओवर के अनुसार बैंक गारंटी पर ही लाईसेंस दिये जावें ताकि व्यापारी किसान का पैसा खाकर नहीं भागे।
  • सब्जीमण्डियों का नवीनीकरण करवाकर उनमें कोल्ड स्टोरेज व गोदाम आदि की आधुनिक सुविधायें उपलब्ध करवायी जावे।
  1. राजस्व -
  • राजस्व अदालतो में भारी भ्रष्टाचार है, मुकदमें वर्षो तक चलते है, तथा पीठासीन अधिकारी पूरे वक्त मुकदमें नहीं सुनते, ऐसे में राजस्व मुकदमो व प्रशासनिक कार्यो के लिये अलग अलग व्यवस्थाऐं हों। मुकदमों की निपटारे की अवधि 2 माह से अधिक नहीं हो।
  • जमीन एलोटमेंट, इन्तकाल खोलने, जमीन के नापतौल के लिये त्वरित व पारदर्शी व्यवस्था हो।
  • प्रत्येक हल्के में पटवारी होना चाहिये।
  • सोलर एनर्जी की केन्द्र की प्रस्तावित योजना के लिये राज्य सरकार प्रस्ताव भेजे।
  • रास्तो के विवाद जल्दी निपटावें ताकि समाज में भाईचारा हो।
  • आवंटन के कई वर्षो बाद भी खातेदारी व गैर खातेदारी अधिकार नहीं दिये गये, सरकार अभियान चलाकर ऐसे किसानो को खातेदारी अधिकार देवें।
  • रिकार्ड रूम अव्यवस्थित है, इस कारण किसानो को काफी परेशानी होती है। रिकार्ड रूम में रिकार्ड व्यवस्थित किये जावें।
  • जमीन/खेतो की अदला बदली के नियम सरल व निशुल्क हो।
  • सीमा विवाद/क्षेत्रफल के विवाद एस.डी.एम. स्वयं मौके पर जाकर हल करें।
  • जमीन नपवाने के लिये किसान चक्कर खाते रहते है। जमीन के नाप 15 दिन में किया जावे।
  1. गो सेवा आयोग, कृषि आयोग, बीज निगम, आदि किसानो से संबंधित आयोगो में किसानो के प्रतिनिधी सम्मिलित किये जावें।
  2. इजरायल, नीदरलेण्ड में खेती संबंधी ट्यूटर जाते है, इसकी सूचना किसान संघ को दी जावे, व वास्तविक किसान ही इसमें भेजे।
  3. चारागाह भूमि का उपयोग ग्राम व शहरो में गायों के उपयोग के लिये किया जावे। जिन लोगों ने अतिक्रमण कर रखा हैं उससे हटाया जाये। व गौचर भूमि को किसी भी सूरत में अवाप्त नहीं की जाये।
  4. बीज व खाद-
    • नकली खाद बीज बेचने पर कठोर सजा व किसानो को मुआवजे का प्रावधान हो।
    • गेंहूं बीज उत्पादन का खरीद मूल्य पूर्व के अनुसार औसत मूल्य के स्थान पर उच्चतम मूल्य किया जावे।
    • बीज उत्पादन पर प्रीमियम 10 वर्षो से एक ही है, इसे बढ़ाया जावे।
    • बीज विक्रेताओं को 15 प्रतिशत कमीशन दिया जाता है, जबकि किसानो को 200-300 रूपये प्रोत्साहन राशि ही दी जाती है, किसानो को इसमें बहुत खर्चा होता है, जबकि अण्डर साईज का मूल्य 15 - 20 प्रतिशत कम मिलता है, तथा 85 रूपये क्विंटल ग्रेडिंग व हेण्डलिंग चार्ज अलग देना पड़ता है।
    • बीज उत्पादन बढ़ाने के लिये किसानो को आधार बीज उपलब्ध करवावें।
    • सरकार पुराने बीजो के कम उत्पादन व गुणवत्ता के बीज मिनीकट के रूप में उपलब्ध करवाती है ऐसे में तीन वर्षो में विकसित बीजो को ही मिनिकट के रूप में बांटा जावे।
  1. अनुदान-
  • राज्य सरकार ने वैसे तो ट्रिप पर 50 प्रतिशत अनुदान घोषित कर रखा है, पर इसकी लागत का आंकलन कम कर दिया है, इस कारण अनुदान मात्र 27 प्रतिशत ही किसानांे को मिलता है। लागत पर ही अनुदान देय होना चाहिये।
  • लघु सीमांत किसान का क्रराईट एरिया 8 बीघा जमीन का होता हैं परन्तु राजस्व विभाग द्वारा सिंचित जमीन 4 बीघा जमीन का ही लघु सीमांत किसान का ही प्रमाण पत्र देते हैं। सिंचित जमीन का भी 8 बीघा का ही क्रराईट एरिया माना जाये।
  1. स्टाम्प शुल्क -
  • राजस्थान सरकार ने हक त्याग, वदल पत्र, पारिवारिक सेटलमेंट पर 1000 से 5000/-रूपये की स्टाम्प ड्यूटी लगा दी है, पहले यह काम 100/-रूपये के स्टाम्प पर होता था, इसे पूर्ववत किया जावे तथा हक त्याग को कानूनी मान्यता दी जावे।
  • शपथपत्र व एग्रीमेंट पर भी स्टाम्प शुल्क बढ़ा दिया है, इसे कम किया जावे।
  1. गो संरक्षण व डेयरी -
  • पूर्व सरकार दूध पर 2 लिटर बोनस दे रही थी। वर्तमान में उसे बंद कर दिया गया हैं इसे वापस लागू किया जाये। व दूध को समर्थन मूल्य घोषित किया जाकर जिसका मूल्य 70 रूपये से कम न किया जाये।
  • यह कि 35 वर्ष पूर्व दूध का कारोबार करने वालों के दूध में पानी मिला हुआ पाया जाता था, तो उनको कठोर सजा दी जाती थी लेकिन आज नकली व जहरीला दूध बनाकर लोंगों स्वास्थय के साथ खिलवाड़ कर रहें उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती, अगर कार्यवाही होती भी है तो फोरी कार्यवाही करके छोड़ दिया जाता हैं। अतः नकली व जहरीला दूध बनाने वालों पर कठोर-कठोर से सजा का प्रावधान हो।
  • हर पंचायत स्तर पर एक पशुचिकत्सालय बनाया जायें तथा वहां पर चिकित्सक की 24 घण्टे ड्यूटी लगाई जाये।
  • देशी गायो की किस्म का बीज प्रत्येक पशु चिकित्सकालय पर हो। तथा पंचायत स्तर पर देशी नंदी की नंदी शाला बनाई जाये।
  • गाय के दूध का मूल्य फेैट के आधार पर तय न होकर औषधीय गुणो के आधार पर तय हो।
  • गोचर भूमि पर गौ अभ्यारण्य बनावें, वहीं पर नस्ल व दुग्ध सुधार कार्यक्रम हो।
  • पशुपालन को बढ़ावा देकर दुग्ध व उससे बनने वाली चीजों के उद्योग विकसित करें।
  1. समर्थन मूल्य -
  • समर्थन मूल्य पर खरीद अलवर पाइलट प्रोजेक्ट के अनुसार हो।
  • समर्थन मूल्य पर अनुदान दिया जावे। जो कम से कम 300 रूपये हो।
  1. वन विभाग-
  • वन विभाग पौधे लगाकर बजट खर्च करता है, बाद में पौधे मर जाते है, ऐसे में जहां पर वन नहीं है, ऐसे क्षेत्रो में किसानो को लीज पर फलदार वृक्ष लगाने के लिये भूमि लीज पर दी जावे।
  • सामान्य बंजड़ भूमि को राजस्व विभाग, वन विभाग को वन भूमि के बदले हस्तांतरित कर देता है, परन्तु अगर उस भूमि पर किसानो का पुराना कब्जा नजरअंदाज किया जाता है, ऐसी भूमियां वन विभाग को न देकर किसानो को दी जावे।
  1. जंगली जानवर-
  • राजस्थान में अनेक क्षेत्रो में जंगली जानवर फसलो को भारी नुकसान पहुंचा रहे है, ऐसे में सरकार या तो इन जानवरो को नियंत्रित करें या किसानो को बाड़ा के लिये अनुदान दिया जाये।
  1. अन्य -
  • राजस्थान सरकार ने पिछले कांग्रेस सरकार के मुकाबले कृषि के अनुदान कम कर दयिे है। जैसे ड्रिफ, सौर उर्जा, पाईप आदि के अनुदान 90 प्रतिशत से कम कर दिये गये।
  • अनुदान सीधे किसानो को दिये जावें।
  • इस बार यू.पी.एल. कम्पनी के माध्यम से बांटे गये अनुदानित बीज जिनमें चना, प्याज, आदि के बीज दिये जो घटिया क्वालिटी के होने से आधा उत्पादन ही दे पाये है, इसकी जांच हो
  • उद्यान विभाग ने 10 वर्ष पुराने बगीचो के पुनः ठीक करने के लिये एक हेक्टर पर 30000/-रूपये का अनुदान उपलब्ध करवाया जो रासायनिक खाद व दवाईयों के रूप में उपलब्ध करवाया, जैविक विधि अपनाने वाले किसानो को इसमें नुकसान हुआ, यह अनुदान नकद दिया जाना चाहिये।

                अन्य कई मांगे और भी है जो समय समय पर सरकार को उपलब्ध करवा दी जावेगी।

                अतः भारतीय किसान संघ ज्ञापन प्रस्तुत कर मांग करता हैं कि आप किसानों की समस्याओं की और सरकार का ध्यानाकािर्षत करवाकर समस्या हल करवाने का कष्ट करें। अन्यथा भारतीय किसान संघ शीघ्र प्रदेश व्यापी आन्दोलन करेगा।