भारतीय किसान संघ का प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन आंदोलन 15 जून को तय।


आंदोलन
के दौरान दूध, सब्जी फसल उत्पादों का किसानो को खुद ही इस्तेमाल करने, बाजार मंडी में नही लाने तथा बाजार से कुछ भी सामान नही खरीदने का आह्वान।

राज्य सरकार का दायित्व है कि बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत फसलों साधारण मूल्य से 10% भाव कम होने पर समर्थन मूल्य घोषित नही होने पर भी फसल की सरकारी खरीद कर मूल्य की उचित लेवल पर स्थिर करें। इसी नीति के तहत उतरप्रदेश सरकार ने आलू की खरीद कर UP के किसानों को आर्थिक रूप से बर्बाद होने से बचाया था। लेकिन राजस्थान की सरकार का किसानों के प्रति सारे दायित्व खत्म करके बैठी हुई है।

जोधपुर, जालौर, बाड़मेर, पाली, सिरोही, जैसलमेर जिलों का  अनिश्चितकालीन आंदोलन जोधपुर संभाग मुख्यालय पर।

विधानसभा का विशेष सत्र बुला कर किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु नीतियों में आवश्यक बदलाव, जालौर महापड़ाव के दौरान सिंचाई योजना जोधपुर महापड़ाव में सभी कृषि विधुत दरों के रोल बेक की घोषणा के बावजूद सरकार द्वारा विधुत सलाहकार आर जी गुप्ता के बहकावे में आकर किसान विरोधी निर्णय कर बून्द-बून्द सिंचाई के कृषि कनेक्शन धारक किसानों की बढ़ी दरे यथावत रख कर धोका करने, सिंगल फेज कृषि कनेक्शन नियमित करने हेतु मोडल सब डिवीज़न चुन कर परीक्षण करने के वादे से मुकरने तथा केंद्र की ओर से सकारात्मक रवैये के बावजूद समर्थन मूल्य पर खरीद नही करके किसानों के हक का अनाधिकृत डाका डाला जिसके परिणाम स्वरूप मजबूरन किसानों को सड़क पर उतरने का एक बार फिर निर्णय करना पड़ा। गूंगी बाहरी सरकार बिना आंदोलन कुछ भी सुनने को तैयार नही।

गत दिनों भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ताओं के सुझावों सरकार द्वारा घोषणा के बावजूद कई मुद्दों पर अमल नही करने, किसानों के प्रति उदासीनता समर्थन मूल्य पर खरीद नही होने से पहले मूंगफली फिर सरसों अब प्याज को उत्पादन लागत से नीचे बेचने की मजबूरी के कारण आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके किसानों के लिए संगठन द्वारा राजस्थान के सभी संभाग मुख्यालयों पर किसानों को अपना हक दिलाने हेतु अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करने की रणनीति तैयार करने के निर्देश मिले जिस पर पिछले तीन दिन से जिले में प्रवास कर किसानों का रुझान लेकर आज दिनांक 23 मई 2017 को लोहावट में जिले के प्रमुख दायित्ववान कार्यकर्ताओ की बैठक कर संभाग मुख्यालय पर 15 जून 2017 को जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन आंदोलन की अंतिम रणनीति तैयार की।

प्रमुख मुद्दे -
1. किसानों के आर्थिक उत्थान हेतु आवश्यक कृषि नीतियों में बदलाव हेतु विधानसभा का विशेष सत्र बुला कर केवल कृषि किसानों के मुद्दे पर चर्चा कर ठोस निर्णय लिए जाने।
2. सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य घोषित कर खाद्यान्न भंडारण की आवश्यकता अनुसार सरकारी खरीद करने इसके अतिरिक्त फसल उत्पादक किसानों को गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर लागत मूल्य बाजार मूल्य की अंतर राशी का सीधा भुगतान किसानों के बैंक खातों में कर घाटे की क्षतिपूर्ति करने।
3. मूंगफली, सरसों प्याज की खरीद नही होने पर लागत से नीचे फसल बिकने के कारण उत्पादन लागत मूल्य बाजार मूल्य की अंतर राशी की क्षतिपूर्ति की जावें।
4. समर्थन मूल्य से नीचे फसल की खरीद बिक्री को अपराध की श्रेणी में लाने।
5. पूर्व में प्रस्तावित सिंचाई योजनाओं के किर्यान्वयन, नई सिंचाई नीति बनाकर सांसद विधायक कोष का भी इस्तेमाल हर खेत तक सिंचाई पानी पहुचाने हेतु करने, यमुना का पानी परबतसर के रास्ते लूनी नदी में लाकर प्रेशर इरिगेशन सिस्टम से नागौर-जोधपुर को सिंचाई हेतु पानी देने की योजना बनाने।
6.स्पेशल श्रेणी ब्लॉक सप्लाई के अतिरिक्त सप्लाई वाले किसानों की बढ़ी कृषि विधुत दरों को वापस लेने।
7. सितम्बर 2015 से लंबित स्पेशल कृषि कनेक्शन आवेदनो का निस्तारण करने।
8. मीटर प्रणाली के बजाय फ्लेट रेट प्रणाली घोषित कर 1000 रुपये प्रति हार्सपावर प्रति वर्ष की दर से वर्ष में दो बार ही खरीफ रबी फसल के बाद कृषि विधुत बिल वसूले जाने।
9. सहकारी ऋण के लिए स्वीकृत सिमा तक सभी किसानों ब्याज मुक्त ऋण देने, केसीसी ऋण धारक किसानों को फसल ऋण नही देने की दशा में 1.50 लाख तक कि सीमा तक राशी ब्याज मुक्त करने।
10. फसल बीमा के बजाय केंद्र-राज्य-किसान द्वारा जमा प्रीमियम के बराबर कोरपस फण्ड बनाकर फसल बीमा के नाम पर जमा पूंजी की लूट बंद करने।
11. पर्यवारण मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक जीएम सरसों सीड्स के व्यवसाहिक उत्पादन की अनुमति नही देने।
12. कृषि उपयोग के यूटिलिटी वाहनों को टोल मुक्त किये जाने की मांग सहित मंडी, राजस्व, खाद-बीज, कृषि शिक्षा, डार्कजोन जैसी स्थानीय प्रदेश स्तर के विभिन्न समस्याओ के समाधान की मांगे शामिल है।